5 Easy Facts About Shodashi Described

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ज्येष्ठाङ्गबाहुहृत्कण्ठकटिपादनिवासिनीम् ॥७॥

नवयौवनशोभाढ्यां वन्दे त्रिपुरसुन्दरीम् ॥९॥

सच्चिद्ब्रह्मस्वरूपां सकलगुणयुतां निर्गुणां निर्विकारां

प्राण प्रतिष्ठा में शीशा टूटना – क्या चमत्कार है ? शास्त्र क्या कहता है ?

॥ इति श्रीमत्त्रिपुरसुन्दरीवेदसारस्तवः सम्पूर्णः ॥

चक्रेऽन्तर्दश-कोणकेऽति-विमले नाम्ना च रक्षा-करे ।

The Shodashi Mantra instills patience and resilience, serving to devotees continue being constant via worries. This gain permits folks to strategy road blocks with calmness and dedication, fostering an interior strength that supports individual and spiritual progress.

Goddess Shodashi has a 3rd eye about the forehead. She is clad in red costume and richly bejeweled. She sits over a lotus seat laid over a golden throne. She is demonstrated with 4 arms in which she retains 5 arrows of bouquets, a noose, a click here goad and sugarcane as a bow.

Her story involves famous battles towards evil forces, emphasizing the triumph of fine around evil as well as the spiritual journey from ignorance to enlightenment.

ह्रीङ्काराङ्कित-मन्त्र-राज-निलयं श्रीसर्व-सङ्क्षोभिणी

The noose represents attachment, the goad signifies repulsion, the sugarcane bow signifies the thoughts as well as the arrows will be the five sense objects.

Her job transcends the mere granting of worldly pleasures and extends towards the purification with the soul, bringing about spiritual enlightenment.

इसके अलावा त्रिपुरसुंदरी देवी अपने नाना रूपों में भारत के विभिन्न प्रान्तों में पूजी जाती हैं। वाराणसी में राज-राजेश्वरी मंदिर विद्यमान हैं, जहाँ देवी राज राजेश्वरी(तीनों लोकों की रानी) के रूप में पूजी जाती हैं। कामाक्षी स्वरूप में देवी तमिलनाडु के कांचीपुरम में पूजी जाती हैं। मीनाक्षी स्वरूप में देवी का विशाल भव्य मंदिर तमिलनाडु के मदुरै में हैं। बंगाल के हुगली जिले में बाँसबेरिया नामक स्थान में देवी हंशेश्वरी षोडशी (षोडशी महाविद्या) नाम से पूजित हैं।

श्री-चक्रं शरणं व्रजामि सततं सर्वेष्ट-सिद्धि-प्रदम् ॥१०॥

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